क्या आप नशा करते हैं अगर इस प्रश्न का उत्तर हां हैं तो माफ कीजिएगा आप अपने देश से प्यार नहीं करते देश को सशक्त संस्कारी और जोश से भरे युवाओं की आवश्यकता है अगर आप नशे के शिकंजे में फंसे हैं तो चाहे दिल में आपके ‍कितनी ही देशभक्ति लहरा रही हो लेकिन देश के वह किसी काम की नहीं अपनी रचनात्मकता का आप दो प्रतिशत भी इस देश को नहीं देते हैं क्योंकि नशा आपको इस लायक छोड़ता ही नहीं है नशा आपसे स्वयं पर नियंत्रण छीन लेता है आपकी सोचने समझने की क्षमता को कमजोर कर देता है जब आप नशे की हालत में होते हैं तब सही गलत का अंतर भूल जाते हैं खुद का भला भी नहीं सोच पाते फिर देश के लिए वक्त कहां से निकालेगें अगर आप अपने आप को यूं बर्बाद कर रहे हैं तो यकीन जानिए कि आप देश को बर्बाद कर रहे हैं हां आप देश से प्यार नहीं कर रहे हैं क्या आप महिलाओं का सम्मान करते हैं अगर इस प्रश्न का उत्तर देने में आपको सोचना पड़ रहा है सीधे सादे प्रश्न को समझने में भी आपको वक्त लग रहा है तो अपने आपसे पूछिए कि क्या सचमुच आप देश को प्यार करते हैं आप दोस्तों के साथ एकांत में लड़कियों को लेकर अश्लील टिप्पणी करते हैं आप लड़कियों की नाजुक भावनाओं से खिलवाड़ करते हैं आपने कितनी ही लड़कियों को अपने प्रेमजाल में फंसा कर छोड़ दिया है आप नेट पर आपत्तिजनक साइट्स ढूंढते हैं लड़कियां आपके लिए मौज मस्ती का विषय है और सड़क चलते बसों और अन्य जगहों पर आप उन पर फब्तियां कसते हैं तब तो आप इस देश में रहने लायक ही नहीं है फिर आपकी दिखावे की देशभक्ति देश के किस काम की यह देश सदियों से नारीत्व को सम्मान देने वाली गरिमामयी संस्कृति के लिए जाना जाता है अगर इस देश में रहकर आप नारी का किसी भी रूप में अपमान करते हैं तो आप इस देश से प्यार नहीं करते क्या आप सड़क पर गंदगी फैलाते हैं इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए आपको अपनी आदतों का निष्पक्ष मुआयना करना होगा पैदल सड़क चलते कार का दरवाजा खोलकर पान की पिक थूकते हैं गंदी पोलिथीन गुटखे के पाउच और सिगरेट के टुकड़े जहां तहां फेंकते हैं ऐतिहासिक स्थलों पर कोयले या चॉक से प्रेम का इजहार करते हैं किसी भी दीवार को बाथरूम समझ लेते हैं घर का कूड़ा दूसरों के घर के सामने छोड़ आते हैं तो खुद ही जवाब दीजिए कि ऐसा कैसा प्यार है आपका जो अपने ही प्यारे देश को गंदा और अव्यवस्थित करने पर तुला है अगर आप इनमें से कोई या इससे मिलती जुलती वह हरकत करते हैं जो सड़क को गंदा करती है तो आपको कोई हक नहीं सरकार की नाकामियों को कोसने का आपको कोई हक नहीं व्यवस्था को गाली देने का और तो और आपको अपने देश को प्यार करने का भी हक नहीं है फिर भी अगर आप अपने देश को चाहते हैं तो यह चाहत देश के लिए तो बेमानी है अपना काम जल्दी करवाने के लालच में आप पैसे देने से नहीं हिचकिचाते या आप खुद किसी काम को जल्दी करने के लिए ऊपरी आमदनी में विश्वास रखते हैं तो इस प्रश्न के उत्तर के साथ ही आपने अपने देश के सच्चे नागरिक होने का अधिकार खो ‍दिया है भ्रष्टाचार तमाम बुराइयों की जड़ है लालच इस भ्रष्टाचार की जननी है अगर आप किसी भी रूप में इस तरह के काम में शामिल हैं तो देश के लिए कितने ही ऊंचे स्वर में नारे लगा लीजिए सब खोखले हैं आप अगर सचमुच अपने देश को प्यार करते हैं तो इसे भीतर से भी खूबसूरत बनाइए कर्मों से ऐसे आदर्श रचिए कि भ्रष्टाचार का मूल समाप्त हो सके एक अकेले अन्ना या किरण बेदी ही क्यों फिक्रमंद हैं देश में लोकपाल बिल लाने के लिए हम आप क्यों नहीं नहीं बनते उनकी ताकत जब हम स्वयं भ्रष्टाचार से दूर होंगे तब ही तो उनका दिल खोलकर साथ दे पाएंगे उस देश में नारी कैसे बच पाएगी जहाँ जन्म लेने से पहले ही उसे कोख में इसलिए मार दिया जाता है क्योंकि वह एक लड़की है और ये ना हो पाया तो उसे कचरे के ढेर में फेंक दिया जाता है जहाँ विवाह के बाद भी उसे इसलिए जला दिया जाता है क्योंकि वह दहेज लोभियों की भूख शांत नहीं कर पाती उस देश में नारी स्वतंत्रता की बातें बेमानी है जहाँ सड़क पर कई गिद्ध उस पर दृष्टि जमाए हुए हैं और मौका मिलते ही उसे नोच खाते हैं जहाँ राजनेता कहते हैं कि जब मर्यादा का उल्लंघन होता है तो सीता हरण होता है कोई मुझे ये बताए कि सीता जी ने अपने जीवन में कौनसी मर्यादा का उल्लंघन किया बल्कि उन्होने तो आजीवन अपने धर्म की अनुपालना की उस देश में न्याय की आशा करना बेकार है जहाँ की पुलिस न्याय की गुहार लगाने वाले पीड़ित को इतनी मानसिक प्रताड़ना देती है कि वह अपने साथ हुए अन्याय को नियति मानकर चुपचाप स्वीकार कर लेता है जहाँ साधु बने बहरूपिये दोषियों को माफ़ करने और पीड़िता को दोषी कहने का साहस रखते हैं ताली एक हाथ से नहीं बजती ये कहने वाले आसाराम जी के कहने का तो यही तात्पर्य है कि लड़की खुद जाती है बलात्कारियों के पास और कहती है मेरा बलात्कार करो जिस देश में शीर्ष पर बैठे लोग इतने संवेदना शून्य हो और उनकी मानसिकता इतनी संकीर्ण और कलुषित हो चुकी हो कि वे अपराध का ख़ात्मा कैसे हो ये सोचने की बजाय मुद्दे को लड़की के कपड़ों की साइज़ में उलझा देते हो या क्षेत्रवाद की राजनीति चमकाने लगते हो ऐसे देश में नारी नहीं बच सकती बिल्कुल भी नहीं आज हमारे मानव समाज में जो भी धर्म प्रचलित हैं वें अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा नहीं कर रहे हैं किसी भी धर्म का उद्देश्य होता है मानव को मानव और ईश्वर के निकट लाना और शांति स्थापित करना पर आज धर्म हमें एक करने की बजाय हमें बाँट रहे हैं एक धर्म ही कई हिस्सों में बंटा हुआ है जब धर्म खुद ही इतने हिस्सों में बंटे हुए हैं तो वह हमें एकता और शांति का पाठ कैसे पढ़ायेंगे कई लोगों के लिए तो धर्म मात्र एक व्यवसाय बन गया है धर्म विशेष के प्रति कट्टरता व्यक्ति को संकीर्ण विचारों वाला बना देती है और वह सत्य